FIR क्या है और FIR कैसे लिखवाए? क्या है नियम

Fir kya hai fir kaise likhwaye आजकल भारत की पुलिस सख्त भी बहुत है फिर भी आये दिन कोई न कोई क्रिमनल या घटना होती रहती जिसकी सुचना पुलिस को नही रहती है तो हमे पुलिस को सुचना देनी होती है

Fir kya hai fir kaise likhwaye

लेकिन कई लोगो को नही पता होता है की F.I.R. है क्या चीज और FIR कैसे लिखवाई जाती है जिन लोगो को पता होता है उन्हें ये पोस्ट पढने की जरूरत नही है लेकिन जिन्हें FIR के बारे में थोडा बहुत जानकारी है या नही उनके लिए मै आज इस पोस्ट में बताऊंगा.

FIR को अगर विस्तार से समझना है तो इस पोस्ट को आखिरी तक जरूर पढ़े शायद ही कोई सवाल बचेगा fir रिलेटेड इस पोस्ट के माध्यम से विस्तार से समझेंगे FIR के बारे में

FIR क्या है ( What is FIR )

FIR एक ऐसा दस्तावेज़ है जो दिखने में तो सिर्फ कागज जैसा लगता है लेकिन वो महत्व बहुत बड़ा रखता है जब भी कोई घटना होती है तो उसकी पहली सुचना हम पुलिस को देते है

जो एक कोरे कागज पर लिखा जाता है उस पर जो घटना घटित होती है उसकी जानकारी लिखी जाती है इसके लिए आपको एक उदाहरण के माध्यम से समझाता हूँ.

उदाहरण:- मान लीजिये आपका मोबाइल कहि रोड पर खो गया तो उसकी आपको पुलिस स्टेशन जाकर FIR लिखवानी जरूरी है क्यूंकि आपके मोबाइल का कोई गलत उपयोग कर सकता है इसमें आप फंस सकते है.

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जब आप पुलिस स्टेशन जायेंगे तो पुलिसकर्मी आपसे सवाल पूछेंगे. जैसे – आप कहाँ जा रहे थे, मोबाइल कैसे गिरा, मोबाइल कंपनी का नाम, किस जगह आपको मोबाइल गिरने का शक लग रहा है,

इसी तरह की घटना की सारी जानकारी एकत्रित करना और उसके ऊपर कार्यवाई करना FIR कहलाता है.

FIR का पूरा नाम ( FIR Full form )

( Fir meaning in hindi ) FIR को हिंदी में प्रथम सूचना विवरण कहते है. और इसे अंग्रेजी में ( Frist Investgation Report ) कहते है और FIR दर्ज होने के बाद कोई भी व्यक्ति या पुलिसकर्मी किसी भी व्यक्ति पर दबाव नही बना सकता है.

FIR कैसे दर्ज करवाए ( How to register Fir )

FIR दर्ज करवाने के लिए जिसके साथ घटना घटित हुई है वो खुद पुलिस स्टेशन जाकर करवा सकता है या उनकी हालत गंभीर है. या कोई अन्य परेशानी है तो उनका रिश्तेदार भी FIR लिखवा सकते है.

जैसे- भाई, माता पिता, चाचा, मामा, जीजा, साला इत्यादि और कोई एमरजेंसी है है तो पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 पर कॉल कर घटना की सुचना पुलिस को दे सकते है

जहाँ घटना घटित होती है FIR उसी एरिया के पुलिस स्टेशन में जाकर दे ताकि जल्द से जल्द करवाई हो सके.

पुलिस को घटना की तारीख और समय जो भी घटना घटी है उसे सही तरीके से और सच लिखवाए ताकि आगे जाकर आपको कोई समस्या का सामना न करना पड़े

आपने जो भी FIR लिखवाई है उसको एक बार पुलिस कर्मी आपको पढ़कर सुनाएगा अगर आप हाँ करते है तो ही उसके ऊपर मोहर लगती है

आप FIR लिखवा रहे है उसकी एक कॉपी आपके पास होना जरूरी है जिस भी थाने में आप FIR दे रहे है उस थाने की मोहर आपकी FIR पर लगी हुई होंनी चाहिए. पुलिस अधिकारी का साइन भी होना जरूरी है

FIR कैसे लिखी जाती है ? (How is written FIR )

बहुत से लोग होते है जो FIR लिखवाते समय गलती कर देते है जिसकी वजह से सही ढंग से कार्यवाई नही हो पाती है और वो केस हार जाते है

इसके लिए साफ शब्दों में लिखा हुआ और सही घटना लिखी हुई होना जरूरी है सबसे पहले आप एक सादा पेपर ले उसके ऊपर एक से 9 तक गिनती लिखे.और उन सब के सामने k लिखे.

  1. K = आपके साथ जो घटना हुई है वो कब हुई
  2. K= आपके साथ जो घटना हुई वो कहा हुई
  3. K= आपके साथ जो घटना की है वो कौन था
  4. K आपके साथ जो घटना की है वो क्यों की है
  5. K= जो घटना हुई है उस समय उनके साथ कौन था
  6. K= जब ये घटना हुई तो किसने देखि
  7. K= जब ये घटना हुई थी तो क्या उनके हाथ में हथियार था
  8. K= जो घटना की है वो क्या थी
  9. K= जो भी घटना थी वो किस प्रकार थी

इसी तरह आप एक 9k पेपर पर लिखकर पुलिस कर्मी को सौंप सकते है और एक कॉपी आपके पास भी रख सकते है

किस मामले में FIR दर्ज होती है ?

FIR दो तरह से दर्ज होती है और FIR अपराध के हिसाब से लिखी जाती है कोई भी व्यक्ति मामूली घटना का FIR नही लिखवा सकता है

जैसे किसी के साथ थोड़ी बहुत बहस हो जाती है और पुलिस स्टेशन जाकर FIR लिखवाके आ जाये ऐसा मुमकिन नही है हाँ आपका मामला मैजिस्ट्रेट में भेजा जा सकता है.

उसके बाद सोच विचार करने के बाद ही FIR लिखी जाती है लेकिन कुछ घटना एसी भी होती है जिस पर ऑन द स्पॉट FIR दर्ज होती है जैसे किसी का मर्डर हो जाता है

या कोई व्यक्ति गोली चलाता है या किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला हो रेप का मामला हो या फिर कोई ऐसा काम जिसे करना कानूनी अपराध है

ऐसे मामलो में धारा 154 के तहत तुरंत fir होती है और उसके ऊपर जल्द ही कार्यवाई शुरू कर दी जाती है तो आपका काम सिर्फ FIR लिखवाना होता है बाकि काम पुलिस का होता है

FIR लिखने से मना करे तो क्या करे ?

अगर एक सची घटना है तो कोई भी पुलिसकर्मी का ये अधिकार नही है की वो FIR लेने से मना करदे लेकिन कभी कभार ऐसा होता है.

एक अनजान व्यक्ति को ये कहकर बाहर कर दिया जाता है की ये घटना हमारे इलाके से बाहर है लेकिन भारतीय कानून ये नही कहता है

हाँ FIR लिखने के बाद दुसरे थाने में ट्रान्सफर कर सकते है अगर कोई भी पुलिसकर्मी ऐसा करता है तो उनकी कोई रिकॉर्डिंग या विडियो क्लिप के माध्यम से आप उनके खिलाप लीगल एक्शन ले सकते है.

क्यूंकि मैंने ऐसा भी सुना है कई बार थाने का SHO भी ऐसा बोल देता है जबकि उनका मना करने का कोई अधिकार नही है.

निष्कर्ष

तो आज आपने इस पोस्ट के माध्यम से FIR kya hai fir kaise likhwaye अगर आपको यह जानकारी हेल्पफुल लगती है तो दुसरे लोगो तक शेयर करे ताकि उनके भी काम आये.

अगर आपके मन में कोई सवाल है तो मुझे कमेन्ट बॉक्स में जरूर पूछे.

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